Geography Optional 2023 Paper I

महासागरीय धारायें कैसे उत्पन्न होती हैं ? प्रशान्त महासागर के विशेष सन्दर्भ में तृतीय जलवायु पर उनके प्रभावों की चर्चा कीजिये । How are ocean currents generated? Discuss their effects on coastal climates with special reference to the Pacific Ocean.

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महासागरीय धाराएँ (Ocean Currents) समुद्र के पानी की निरंतर, निर्देशित गति हैं। ये पृथ्वी की जलवायु प्रणाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, ऊष्मा को भूमध्य रेखा से ध्रुवों तक और ठंडे पानी को ध्रुवों से भूमध्य रेखा तक स्थानांतरित करती हैं।

महासागरीय धाराओं की उत्पत्ति के कारण:

महासागरीय धाराएँ कई कारकों के संयोजन से उत्पन्न होती हैं:

  1. पवनें (Winds): महासागर की सतह पर बहने वाली प्रचलित पवनें (जैसे व्यापारिक पवनें और पछुआ पवनें) पानी को अपनी दिशा में धकेलती हैं, जिससे सतही धाराएँ उत्पन्न होती हैं। यह सबसे महत्वपूर्ण ड्राइविंग बलों में से एक है।
  2. कोरिओलिस बल (Coriolis Force): पृथ्वी के घूर्णन के कारण, गतिमान जल उत्तरी गोलार्ध में दाईं ओर और दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर विक्षेपित होता है। यह बल धाराओं के वृत्ताकार पैटर्न (gyres) के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  3. तापमान और लवणता में अंतर (Differences in Temperature and Salinity): ठंडे, खारे पानी का घनत्व गर्म, कम खारे पानी की तुलना में अधिक होता है। यह घनत्व अंतर गहरे समुद्र की धाराओं को चलाता है, जिसे थर्मोहेलाइन परिसंचरण (Thermohaline Circulation) कहा जाता है। ध्रुवीय क्षेत्रों में, ठंडा होने और बर्फ बनने से पानी अधिक खारा और घना हो जाता है, जिससे यह डूब जाता है और गहरे समुद्र में बहने लगता है।
  4. गुरुत्वाकर्षण (Gravity): गुरुत्वाकर्षण बल पानी को उच्च स्तर से निम्न स्तर की ओर खींचता है, जिससे ढलान के साथ धाराएँ उत्पन्न होती हैं।
  5. महाद्वीपीय बाधाएँ (Continental Barriers): महाद्वीप धाराओं के प्रवाह को बाधित करते हैं और उन्हें मोड़ते हैं, जिससे जटिल परिसंचरण पैटर्न बनते हैं।
  6. ज्वार-भाटा (Tides): चंद्रमा और सूर्य के गुरुत्वाकर्षण खिंचाव से उत्पन्न ज्वार-भाटा भी स्थानीय स्तर पर धाराओं को प्रभावित कर सकता है।

प्रशांत महासागर के विशेष संदर्भ में तटीय जलवायु पर प्रभाव: प्रशांत महासागर दुनिया का सबसे बड़ा और गहरा महासागर है, और इसकी धाराएँ वैश्विक जलवायु को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करती हैं, विशेष रूप से इसके तटीय क्षेत्रों को।

  1. तापमान का विनियमन (Regulation of Temperature):

    • गर्म धाराएँ: भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर बहने वाली गर्म धाराएँ (जैसे कुरोशियो धारा जापान के तट पर, पूर्वी ऑस्ट्रेलियाई धारा ऑस्ट्रेलिया के पूर्वी तट पर) तटीय क्षेत्रों को गर्म करती हैं। उदाहरण के लिए, कुरोशियो धारा जापान के तटीय क्षेत्रों में सर्दियों को हल्का बनाती है, जिससे तापमान अधिक रहता है और वर्षा होती है।
    • ठंडी धाराएँ: ध्रुवों से भूमध्य रेखा की ओर बहने वाली ठंडी धाराएँ (जैसे कैलिफ़ोर्निया धारा उत्तरी अमेरिका के पश्चिमी तट पर, पेरू धारा/हम्बोल्ट धारा दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तट पर) तटीय क्षेत्रों को ठंडा करती हैं। कैलिफ़ोर्निया धारा कैलिफ़ोर्निया के तट पर तापमान को कम रखती है, जिससे अक्सर तटीय कोहरा और शुष्क ग्रीष्मकाल होता है। पेरू धारा चिली और पेरू के तटों को ठंडा करती है, जिससे अटाकामा जैसे शुष्क रेगिस्तान बनते हैं, क्योंकि ठंडी हवा में नमी धारण करने की क्षमता कम होती है और यह वर्षा नहीं करती।
  2. वर्षा पैटर्न (Precipitation Patterns):

    • गर्म धाराएँ ऊपर की हवा को गर्म और नम करती हैं, जिससे तटीय क्षेत्रों में वर्षा की संभावना बढ़ जाती है।
    • ठंडी धाराएँ ऊपर की हवा को ठंडा करती हैं, जिससे हवा की नमी धारण करने की क्षमता कम हो जाती है और अक्सर शुष्क या रेगिस्तानी स्थितियाँ बनती हैं (जैसे पेरू धारा के कारण अटाकामा रेगिस्तान)।
  3. एल नीनो और ला नीना (El Niño and La Niña):

    • ये प्रशांत महासागर में आवधिक जलवायु पैटर्न हैं जो वैश्विक मौसम को प्रभावित करते हैं। सामान्यतः, व्यापारिक पवनें पश्चिमी प्रशांत की ओर गर्म पानी को धकेलती हैं।
    • एल नीनो (El Niño): व्यापारिक पवनों के कमजोर पड़ने से गर्म पानी पूर्वी प्रशांत की ओर लौट आता है। इससे पेरू और इक्वाडोर के तटों पर असामान्य रूप से गर्म और नम मौसम होता है, जिससे भारी वर्षा और बाढ़ आती है, जबकि पश्चिमी प्रशांत (जैसे ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया) में सूखा पड़ता है।
    • ला नीना (La Niña): व्यापारिक पवनों के मजबूत होने से पश्चिमी प्रशांत में अधिक गर्म पानी जमा होता है और पूर्वी प्रशांत में ठंडा पानी ऊपर आता है। इससे पश्चिमी प्रशांत में अधिक वर्षा और पूर्वी प्रशांत में सूखा पड़ता है।
  4. समुद्री जीवन और मत्स्य पालन (Marine Life and Fisheries):

    • ठंडी धाराएँ अक्सर पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं (अपवेलिंग के कारण), जो फाइटोप्लैंकटन और मछली के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ बनाती हैं। पेरू धारा दुनिया के सबसे उत्पादक मत्स्य क्षेत्रों में से एक का समर्थन करती है। गर्म धाराएँ भी विभिन्न समुद्री प्रजातियों का समर्थन करती हैं, लेकिन पोषक तत्वों की उपलब्धता भिन्न हो सकती है।

संक्षेप में, प्रशांत महासागर की धाराएँ तटीय क्षेत्रों के तापमान, वर्षा, और पारिस्थितिकी तंत्र को नियंत्रित करके उनकी जलवायु को गहराई से प्रभावित करती हैं, जिससे दुनिया भर में विविध प्रकार के तटीय वातावरण बनते हैं।