Geography Optional 2023 Paper I

गहन पारिस्थितिकी (डीप इकॉलॉजी) एक संकल्पना के रूप में उथली पारिस्थितिकी (शैलो इकॉलॉजी) से किस प्रकार भिन्न है ? स्पष्ट कीजिये । How is 'Deep Ecology' as a concept different from 'Shallow Ecology'? Explain.

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गहन पारिस्थितिकी (Deep Ecology) और उथली पारिस्थितिकी (Shallow Ecology) पर्यावरण दर्शन के दो प्रमुख दृष्टिकोण हैं जो मानव-प्रकृति संबंध और पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान के बारे में मौलिक रूप से भिन्न विचार रखते हैं। इन अवधारणाओं को पहली बार 1973 में नॉर्वेजियन दार्शनिक आर्ने नेस (Arne Næss) द्वारा प्रस्तुत किया गया था।

उथली पारिस्थितिकी (Shallow Ecology): उथली पारिस्थितिकी एक मानव-केंद्रित (anthropocentric) दृष्टिकोण है। यह मानता है कि पर्यावरण का मूल्य मुख्य रूप से मानव उपयोगिता और कल्याण पर आधारित है। पर्यावरणीय समस्याओं को हल करने का इसका प्राथमिक लक्ष्य मानव स्वास्थ्य, जीवन की गुणवत्ता और संसाधनों की उपलब्धता को बनाए रखना है।

  • मुख्य फोकस: प्रदूषण, संसाधन की कमी, और पर्यावरणीय क्षरण जैसी समस्याओं को हल करना, लेकिन मुख्य रूप से मानव हितों की रक्षा के लिए।
  • मूल्य प्रणाली: मानव-केंद्रित; प्रकृति का मूल्य उसके उपयोगितावादी मूल्य में निहित है (जैसे संसाधन, मनोरंजन, सौंदर्य)।
  • समाधान: तकनीकी समाधान, बेहतर प्रबंधन, कानून और नीतियां जो मानव समाज को कम से कम बाधित करें। उदाहरण के लिए, प्रदूषण नियंत्रण, ऊर्जा दक्षता, पुनर्चक्रण।
  • नैतिकता: मानव की जरूरतों और इच्छाओं को प्राथमिकता दी जाती है।
  • उदाहरण: स्वच्छ हवा और पानी क्योंकि वे मानव स्वास्थ्य के लिए अच्छे हैं; वनों का संरक्षण क्योंकि वे लकड़ी और अन्य उत्पाद प्रदान करते हैं।

गहन पारिस्थितिकी (Deep Ecology): गहन पारिस्थितिकी एक प्रकृति-केंद्रित (ecocentric) या जैव-केंद्रित (biocentric) दृष्टिकोण है। यह मानता है कि सभी जीवित चीजों का आंतरिक मूल्य (intrinsic value) है, चाहे वे मानव के लिए उपयोगी हों या न हों। यह पर्यावरणीय समस्याओं की जड़ को मानव-केंद्रित विश्वदृष्टि और प्रकृति पर मानव प्रभुत्व की धारणा में देखता है।

  • मुख्य फोकस: मानव-प्रकृति संबंध में एक मौलिक बदलाव लाना, जिसमें मानव को एक बड़े पारिस्थितिक तंत्र के हिस्से के रूप में देखा जाता है, न कि उसके ऊपर। यह जैव विविधता और पारिस्थितिक तंत्र की अखंडता को बनाए रखने पर जोर देता है।
  • मूल्य प्रणाली: प्रकृति-केंद्रित; सभी जीवित चीजों और पारिस्थितिक तंत्रों का अपना आंतरिक मूल्य होता है, जो मानव उपयोगिता से स्वतंत्र होता है।
  • समाधान: जीवन शैली में मौलिक परिवर्तन, उपभोग में कमी, जनसंख्या नियंत्रण, और एक ऐसी विश्वदृष्टि को अपनाना जो प्रकृति के साथ सामंजस्य पर जोर देती है। यह केवल लक्षणों का इलाज करने के बजाय समस्याओं की गहरी जड़ों को संबोधित करता है।
  • नैतिकता: मानव और गैर-मानव जीवन रूपों के बीच समानता पर जोर दिया जाता है। मानव को अन्य प्रजातियों के साथ सह-अस्तित्व में रहना चाहिए।
  • उदाहरण: एक प्रजाति का संरक्षण क्योंकि उसका अस्तित्व का अधिकार है, भले ही वह मानव के लिए कोई प्रत्यक्ष लाभ न दे; मानव जनसंख्या और उपभोग को कम करना ताकि अन्य प्रजातियों के लिए जगह बन सके।

मुख्य अंतर संक्षेप में:

| विशेषता | उथली पारिस्थितिकी (Shallow Ecology) | गहन पारिस्थितिकी (Deep Ecology) | | :------------- | :---------------------------------- | :------------------------------------ | | दृष्टिकोण | मानव-केंद्रित (Anthropocentric) | प्रकृति-केंद्रित (Ecocentric/Biocentric) | | मूल्य | उपयोगितावादी (Instrumental Value) | आंतरिक मूल्य (Intrinsic Value) | | लक्ष्य | मानव कल्याण और संसाधन प्रबंधन | पारिस्थितिक तंत्र की अखंडता और जैव विविधता | | समाधान | तकनीकी, प्रबंधन, नीतिगत सुधार | जीवन शैली में मौलिक परिवर्तन, विश्वदृष्टि में बदलाव | | नैतिकता | मानव की प्राथमिकता | सभी जीवन रूपों की समानता |

गहन पारिस्थितिकी उथली पारिस्थितिकी की तुलना में अधिक कट्टरपंथी और परिवर्तनकारी दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है, जो पर्यावरणीय संकट को केवल तकनीकी या नीतिगत समस्या के बजाय एक दार्शनिक और नैतिक संकट के रूप में देखती है।