विविध राजनैतिक हित और वित्तीय सीमाएँ 'सहयोगी संघवाद' की भावना को बाधित करते हैं। टिप्पणी कीजिए। Divergent political interests and financial constraints hinder the spirit of 'cooperative federalism'. Comment.
सहयोगी संघवाद (Cooperative Federalism) एक ऐसा मॉडल है जहाँ केंद्र और राज्य सरकारें राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए मिलकर काम करती हैं, एक-दूसरे के साथ सहयोग करती हैं और साझा जिम्मेदारियों को निभाती हैं। हालांकि, भारत में विविध राजनीतिक हित और राज्यों की वित्तीय सीमाएँ अक्सर इस भावना को बाधित करती हैं।
विविध राजनैतिक हित:
- विभिन्न राजनीतिक दलों का शासन: जब केंद्र और राज्यों में अलग-अलग राजनीतिक दलों की सरकारें होती हैं, तो अक्सर नीतियों और कार्यक्रमों पर मतभेद उत्पन्न होते हैं। राज्य सरकारें केंद्र की नीतियों को राजनीतिक कारणों से स्वीकार करने या लागू करने में हिचकिचा सकती हैं, भले ही वे राज्य के लिए फायदेमंद हों।
- क्षेत्रीय आकांक्षाएँ बनाम राष्ट्रीय हित: राज्य अक्सर अपनी क्षेत्रीय पहचान और आकांक्षाओं को राष्ट्रीय हितों से ऊपर रखते हैं, जिससे केंद्र के साथ टकराव होता है। भाषा, सीमा विवाद, जल-बंटवारा जैसे मुद्दे राज्यों के बीच और केंद्र-राज्य के बीच तनाव पैदा करते हैं।
- राजनीतिकरण और आरोप-प्रत्यारोप: विभिन्न राजनीतिक दल अक्सर एक-दूसरे पर दोषारोपण करते हैं, खासकर आपदाओं या आर्थिक संकट के समय, जिससे सहयोग का माहौल खराब होता है। केंद्रीय एजेंसियों (जैसे CBI, ED) के कथित दुरुपयोग से भी राज्यों में अविश्वास बढ़ता है।
- राज्यपाल की भूमिका: राज्यपाल, जो केंद्र का प्रतिनिधि होता है, की भूमिका को अक्सर राजनीतिक रूप से प्रेरित माना जाता है, जिससे राज्य सरकारों के साथ संबंध तनावपूर्ण हो जाते हैं।
वित्तीय सीमाएँ (Financial Constraints):
- राजकोषीय असंतुलन: भारतीय संविधान ने राज्यों को व्यय की अधिक जिम्मेदारियां दी हैं (जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा, कानून व्यवस्था), लेकिन राजस्व जुटाने के सीमित स्रोत (जैसे जीएसटी में राज्यों का हिस्सा, कुछ राज्य कर) दिए हैं। इससे राज्य वित्तीय रूप से केंद्र पर अत्यधिक निर्भर हो जाते हैं।
- केंद्रीय अनुदानों पर निर्भरता: राज्य केंद्र सरकार से मिलने वाले अनुदानों और केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं पर बहुत अधिक निर्भर करते हैं। ये अनुदान अक्सर शर्तों के साथ आते हैं, जिससे राज्यों की अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार खर्च करने की स्वायत्तता कम हो जाती है।
- जीएसटी का प्रभाव: वस्तु एवं सेवा कर (GST) ने राज्यों की कुछ कर लगाने की शक्तियों को छीन लिया है, जिससे वे राजस्व के लिए केंद्र पर और अधिक निर्भर हो गए हैं। जीएसटी मुआवजे को लेकर भी केंद्र और राज्यों के बीच विवाद उत्पन्न हुए हैं।
- ऋण का बोझ: कई राज्य उच्च ऋण के बोझ तले दबे हुए हैं, जिससे उनकी विकास परियोजनाओं को वित्तपोषित करने की क्षमता सीमित हो जाती है और वे केंद्र से अधिक वित्तीय सहायता की मांग करते हैं।
ये दोनों कारक मिलकर 'सहयोगी संघवाद' की भावना को कमजोर करते हैं। विविध राजनीतिक हित अविश्वास और टकराव को बढ़ावा देते हैं, जबकि वित्तीय सीमाएँ राज्यों को केंद्र पर निर्भर बनाती हैं और उनकी स्वायत्तता को कम करती हैं। इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए, अंतर-राज्यीय परिषद, नीति आयोग और जीएसटी परिषद जैसे मंचों को मजबूत करना और केंद्र-राज्य संबंधों में अधिक पारदर्शिता और विश्वास स्थापित करना आवश्यक है।